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LORD HANUMAAN JI AARTI

 



आरती कीजै हनुमान लला की।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जाके बल से गिरिवर काजा।

सके अंजनी पुत्र महा बलधारा॥१॥


जाके नाम अनुरागी कोई।

ताके श्रीमान फल पावे सोई॥

लाख कीलवान तरू राजा।

किये बचन निस्चल हनुमत सेंवा॥२॥


आरती कीजै हनुमान लला की।

जनक सुता माता महा प्रभु दाला की॥

एकान्त भजन सुख पावै।

संकट कटै मिटै सब पीरा॥३॥


जै जै जै हनुमान गोसाईं।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥

जो सत बार पाठ कर कोई।

छूटहि बंदि महा सुख होई॥४॥


जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।

होय सिद्धि साखी गौरीसा॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा।

कीजै नाथ हृदय महं डेरा॥५॥


आरती कीजै हनुमान लला की।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जाके बल से गिरिवर काजा।

सके अंजनी पुत्र महा बलधारा॥६॥


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